प्रदोष व्रत फाल्गुन शुक्ल 2020 Pradosh Vrat Date Time in March 2020

प्रदोष व्रत पूजा विधि 2020 Pradosh Vrat Poja Vidhi

प्रदोष व्रतप्रदोष व्रत को त्रयोदशी व्रत के नाम से भी जाना जाता हैं। प्रत्येक माह में 2 बार प्रदोष व्रत आता है. यदि यह प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़े तो इसे शनि प्रदोष कहा जाता है शनि प्रदोष का योग बेहद शुभ योग होता है मान्यता है की इस शुभ योग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा और व्रत किया जाय तो व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी की जा सकती है साथ ही जिन लोगो को शनि की दशा होती है ज्योतिष शास्त्र अनुसार यदि शनि प्रदोष के दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय किये जाय तो शनि दोषो से छुटकारा मिलता है आज इस वीडियो में हम आपको साल 2020 मार्च महीने में आने वाले पहले शनि प्रदोष व्रत की शुभ तिथि पूजा विधि और इस दिन किये जाने वाले उपायों के बारे में बताएँगे.

प्रदोष व्रत तिथि Pradosh Vrat January Month Date

साल 2020 मार्च माह में पहला प्रदोष व्रत 7 मार्च शनिवार के दिन रखा जाएगा.  यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है चंद्र मास के तेरहवें दिन अर्थात त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है. इस व्रत से जुडी एक प्राचीन कथा के अनुसार एक बार चंद्र को क्षय रोग होने के कारण बहुत कष्ट हो रहा था और जिस दिन भगवान शिव ने उनके इस दोष का निवारण करते हुए उन्हें पुनः जीवनदान दिया था वो त्रयोदशी तिथि थी इसीलिए यह दिन प्रदोष कहा जाने लगा। सूर्यास्त के बाद और रात के आने से पहला का समय प्रदोष काल कहलाता है.

प्रदोष व्रत पूजा सामग्री Pradosh Vrat Pujan Samgri

प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है लेकिन शनिवार के दिन होने के कारन यह शनि प्रदोष होगा जिस कारण इस दिन शनिदेव की पूजा करने से और भी अधिक लाभ प्राप्त होंगे. शनि प्रदोष की पूजा के लिए ताँबे का लोटा, दूध, वस्त्र, चावल, धुप दीप, चन्दन, फूल, बेलपत्र, नारियल, पान, सुपारी आदि सभी जरूरी सामग्री अपनी श्रद्धानुसार रख ले.

प्रदोष व्रत पूजा विधि Pradosh Vrat Puja Vidhi

शनि प्रदोष के दिन की पूजा और मंत्र शाम के समय अर्थात प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है शनि त्रयोदशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान के बाद निराहार व्रत का संकल्प कर सर्वप्रथम भगवान शिव की आराधना करे. भगवान शिव को पूजा में बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि सभी पूजन सामग्री अर्पित करते हुए महादेव के मंत्र ऊँ नम: शिवाय का जाप करें और जल का अर्घ्य दे इसके बाद भगवान शिव को चावल की खीर का भोग लगाकर व्रत कथा पढ़े व सुने और अंत में भगवान भोलेनाथ से अपने परिवार की सुख समृद्धि की कामना करे. भगवान शिव की पूजा के बाद शनिदेव का पूजन कर शनि चालीसा का पाठ कर ले शनि प्रदोष जीवन में धन धन्य में वृद्धि करने वाला और सभी दुखो से छुटकारा दिलाने वाला होता है.

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शनि प्रदोष का महत्व Importance and Benefits of Pradosh Vrat

वैसे तो हर महीने आने वाले प्रदोष व्रत पुण्य फल दायी होती है लेकिन भगवान शिव और शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शनि प्रदोष बहुत खास होता है शनि प्रदोष का व्रत करने से सभी दोषो से छुटकारा मिलता है. शास्त्रों में ऐसी मान्यता है की प्रदोष काल के दौरान साक्षात् भगवान शिव शिवलिंग पर अवतरित होते है इसीलिए इस समय की गयी उनकी आराधना से भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है.

शनि प्रदोष व्रत कथा Shani Pradosh Vrat Katha 

प्राचीन समय में एक नगर में समृद्धशाली सेठ रहता था। कारोबार से लेकर व्यवहार में भी वह सेठ अच्छे  आचरण का था। धर्म-कर्म के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। उसकी तरह ही उसकी पत्नी भी हर कदम पर पुण्य कार्यों में सेठ जी का साथ देती थी। लेकिन एक बार भगवान ने अपने इस भक्त की परीक्षा ली उनके कोई संतान नहीं थी इस बात से दुखी होकर उन्होंने तीर्थ यात्रा पर जाने का निर्णय लिया। दोनों गांव से बाहर निकले ही थे की उन्होंने मार्ग में प्राचीन बरगद के नीचे एक साधु को समाधि में लीन देखे वे दोनों साधु के सामने हाथ जोड़ कर बैठ गये। जब समय ढ़लता गया पूरा दिन और पूरी रात गुजर जाने के बाद भी वे दोनों हाथ जोड़े बैठे रहे। जब प्रात:काल साधु समाधि से उठे और आंखे खोली तो दंपति को देखकर मुस्कुराने लगे और बोले मैने तुम्हारी परेशानी को जान लिया है। साधु ने उन्हें कहा कि एक वर्ष तक शनिवार के दिन आने वाली त्रयोदशी का तुम व्रत रखना इससे तुम्हारी इच्छा पूरी होगी। तीर्थ यात्रा से लौटने पर सेठ दंपति ने साधु के कहे अनुसार शनि प्रदोष व्रत किया जिससे उनकी हर इच्छा पूरी हो गयी.

शनि प्रदोष व्रत उद्यापन विधि Pradosh Vrat Updhayapan Vidhi

शास्त्रों के अनुसार जो लोग शनि प्रदोष व्रत को 11 या फिर 26 त्रयोदशी तक रखते हैं तो उन्हें व्रत का उद्यापन पूरे विधि विधान से करना चाहिए.

  1. व्रत का उद्यापन त्रयोदशी तिथि के दिन ही करे.
  2. प्रदोष व्रत के उद्यापन से पहले श्री गणेश जी की पूजा करे.
  3. अगले दिन त्रयोदशी तिथि को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर ऊँ उमा सहित शिवाय नम: मंत्र का 108 बार जाप और हवन करे.
  4. हवन पूरा होने के बाद भगवान शिव की आरती और शान्ति पाठ करे.
  5. अंत में दो ब्रह्माणों को भोजन कराकर उद्यापन की विधि पूरी करे.

शनि प्रदोष व्रत महाउपाय Pradosh Vrat Mahaupay

प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ शनिदेव की कृपा पाने के लिए विशेष माना जाता है शास्त्रों के अनुसार यदि शनि प्रदोष के दिन कुछ उपाय किये जाय तो व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होने के साथ ही उसे सुखी दांपत्य जीवन और उसकी यश कीर्ति में वृद्धि का वरदान मिलता है.

  1. शनि प्रदोष के दिन भगवान को तिल का भोग अर्पितकर गरीबों को भी भोग खिलाने और काली चीजों का दान करने से भगवान शिव और शनि देव प्रसन्न होते है.
  2. शनि प्रदोष के दिन तेल का दान करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।