कजरी तीज तिथि पूजा विधि Kajari Teej Date Time 2020

कजरी तीज 2020 कब है Kajari Teej Date Time 2020

कजरी तीजकजरी तीज- जिस तरह हरियाली तीज का पर्व महिलाओं में सबसे लोकप्रिय है ठीक उसी तरह कजरी तीज का पर्व भी महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज का त्योहार मनाया जाता है। कजरी तीज को कजली तीज, बूढ़ी तीज व सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है. यह व्रत सुहागन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। आज हम आपको साल 2020 कजरी तीज व्रत की शुभ तिथि पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि और इस व्रत के नियम और इससे जुडी सभी मत्वपूर्ण बाते बताएँगे,

कजरी तीज तिथि व शुभ मुहूर्त Kajari Teej Date time tithi Muhurt 2020

  1. साल 2020 में कजरी तीज का व्रत 6 अगस्त गुरुवार के दिन रखा जाएगा.
  2. तृतीया तिथि शुरू होगी 05, अगस्त सायंकाल 10:50 मिनट पर ||
  3. तृतीया तिथि समाप्त होगी 07, अगस्त प्रातःकाल 12:14 मिनट पर ||

कजरी तीज पूजा विधि Kajari Teej Puja Vidhi

कजरी तीज के दिन नीमड़ी माता की पूजा की जाती हैं. यह व्रत सुहागन महिलाओं द्वारा सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला रखने की परंपरा है बहुत सी जगहों पर कुवांरी लड़कियां योग्य वर प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। इसकी पूजा के लिए मिट्टी और गोबर से दीवार के किनारे तालाब जैसी आकृति बना ले और उस पर घी और गुड़ से पाल बांधे | अब तालाब जैसी आकृति पर कच्चा दूध और जल डालकर दिया प्रज्वलित करे.  थाली में नींबू, ककड़ी, केला, सेब, सत्तू, रोली, मौली, अक्षत आदि पूजन सामग्री नीमड़ी माता को अर्पित करे. दीवार पर मेहंदी, रोली की 13 बिंदिया व काजल की भी 13 बिंदी लगाएं, उसके बाद जो भी चीजें आपने माता को अर्पित की हैं, उसका प्रतिबिंब तालाब के दूध और जल में देखें. मान्यता है की ऐसा करने से महिलाओ को अखंड सुहाग, और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. अगले दिन स्नान के बाद गाय को गुड़ खिलाने के बाद व्रत खोलना संपन्न करे.

चंद्रमा को अर्घ्य देने की सही विधि Chand Arghya Vidhi

शास्त्रों के अनुसार कजरी तीज पर चाँद निकलने पर पूजा के बाद चंद्रमा को अर्ध्य दिया जाता है। अर्घ्य देने से पूर्व चन्द्रमा को रोली, अक्षत और मौली अर्पित करें। इसके बाद गेंहू के दानों को हाथ में लेकर चंद्रमा के अर्ध्य देते हुए अपने स्थान पर खड़े होकर परिक्रमा करें।

कजरी तीज व्रत नियम Kajari Teej Fast Rules.

  1. शास्त्रों के अनुसार इस दिन महिलाओं को किसी पर भी क्रोध नहीं करना चाहिए।
  2. यदि संभव हो तो व्रत की रात जागरण कर भजन कीर्तन करने चाहिए.
  3. कजरी तीज के दिन दुसरो की बुराई या किसी बड़े बूढ़े का अपमान नहीं करना चाहिए.
  4. यह व्रत निर्जल रहकर किया जाता है। हालांकि गर्भवती महिलाये फलाहार कर सकती हैं।
  5. यदि किसी भी कारणवस चांद उदय होते न दिख तो रात्रि में लगभग 11:30 मिनट पर आसमान की ओर अर्घ्य देकर व्रत खोला जा सकता है।
  6. यदि आप व्रत का उद्यापन कर लेते है और पुनः निर्जल व्रत नहीं रख पाते है तो आप इस व्रत को फलाहार भी कर सकते है.
  7. कजरी तीज के दिन श्रृंगार को अधिक महत्व दिया जाता है, इसलिए इस दिन सोलह श्रृंगार अवश्य करना चाहिए बिना श्रृंगार के नहीं रहना चाहिए.