सावन दूसरा मंगला गौरी व्रत पूजन विधि | Second Mangala Gauri Vrat Date 2020

मंगला गौरी व्रत मंगला गौरी व्रत शुभ योग व लाभ Mangala Gauri Pujan Samagri

मंगला गौरी व्रतमंगला गौरी व्रत- सावन के महीने को भगवान शिव आराधना का माह माना गया है और सावन माह में विशषकर सोमवार के दिन भगवाब शिव की पूजा आराधना की जाती है. ठीक वैसे सावन माह के प्रत्येक मंगलवार के दिन मां मंगला गौरी की उपासना की जाती है. यह व्रत विवाहित और अविवाहित महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मना जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और योग्य वर की कामना के साथ किया जाता है। आज हम आपको साल 202 सावन माह के दूसरे मंगला गौरी व्रत की शुभ तिथि, पूजन सामग्री, इस दिन बनने वाले शुभ योग, पूजा विधि और इस व्रत के उद्यापन विधि के बारे में बताएँगे।

मंगला गौरी व्रत पूजा समाग्री Mangla Gauri Vrat Pujan Samagri 

साल 2020 का दूसरा मंगला गौरी व्रत 14 जुलाई मंगलवार के दिन रखा जाएगा। जो भी लोग इस व्रत को करते है उन्हें व्रत की सामग्री के रूप में लाल फूलों की 16 मालाएं, 16 की गिनती में श्रृंगार का सामान,  सुपारी, इलायची, फल-फूल, पान, सूखे मेवे, मिठाई व सात प्रकार के अनाज की जरूरत होगी |

मंगला गौरी व्रत पूजा विधि Mangala Gauri Vrat Niyam

सावन माह के मंगलवार के दिन प्रथा नित्य कर्मो से निवृत्त होकर स्नानादि के बाद व्रत का संकल्प ले और एक साफ़ चौकी पर लाल कपड़ा बिछा ले इस चौकीपर चावल से नवग्रह बनाकर प्रथम पूज्य गणपति को स्थापित कर उनके समक्ष जल से भरा कलश स्थापित करे और सर्वप्रथम श्रीगणेश का पूजन करे. इसके बाद आटे से निर्मित दिया बनाकर षोडशोपचार से माता गौरी की पूजा करे. पूजा में माँ गौरी को 16 की संख्या में सुहाग का सभी सामान व अन्य पूजन सामग्री अर्पित करे और इसके बाद मंगला गौरी व्रत कथा पढ़कर सभी में प्रसाद वितरण करे.

मंगला गौरी व्रत शुभ योग व लाभ Mangla Gauri Vrat Shubh Yog

सावन के दूसरे मंगला गौरी व्रत के दिन अभिजीत मुहूर्त, अमृतयोग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा इसीलिए जो भी इस दिन मंगला गौरी का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ रखकर इस व्रत की कथा पढता है उसे उत्तम स्वास्थ्य और समृद्ध शैली जीवन का वरदान मिलता है इसके अलावा विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य कीऔर कुवारी कन्याये यदि इस व्रत को करे तो उन्हें योग्य वर की प्राप्ति होती है. जिन जातको की जन्म कुंडली में मांगलिक दोष होता है इस व्रत के प्रभाव से वह दोष कम हो जाता है.

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मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि Mangala Gauri Vrat Udhyapan Vidhi

यदि आप 5 वर्षो तक इस व्रत को करते है तो आपको उद्यापन अवश्य करना चाहिए उद्यापन लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर लाल वस्त्र धारण करे इसके बाद ब्राह्मण और सोलह सुहागन स्त्रियों को भोजन के लिए आमंत्रित करें। अपने पति के साथ हवन और माँ गौरी का विधिवत पूजन करें और मां को श्रृंगार समान अर्पित करें। हवन के बाद माता मंगला गौरी की आरती करे और सभी में सभी में प्रसाद वितरण करें। अंत में ब्राह्मण और सभी सोलह स्त्रियों को भोजन कराएं दान दक्षिणा देकर विदा करे.