चैत्र नवरात्रि अष्टमी महायोग 2020 Navratri 2020 Durga Ashtami Mahasanyog

चैत्र नवरात्रि महाअष्टमी पूजा विधि Chaitra Navratri Puja Vidhi

चैत्र नवरात्रिचैत्र नवरात्रि साल 2020 में चैत्र नवरात्रो की शुरुआत 25 मार्च से हुई है माँ दुर्गा को समर्पित यह पर्व 9 दिनों तक मनाया जाता है चैत्र नवरात्रो में अष्टमी तिथि के दिन देवी दुर्गा के महागौरी स्वरुप की आराधना की जाती है. ज्योतिष व शास्त्रों की माने तो इस बार अष्टमी तिथि के दिन बेहद खास संयोग बन रहा है जिस कररण इस महायोग में की गयी पूजा बेहद फलदायी और मनोकामना पूरी करने वाली होगी आज हम आपको साल 2020 चैत्र नवरात्रि महा अष्टमी शुभ योग और इस शुभ योग में की जाने वाली पूजा विधि के बारे में बताएँगे.

नवरात्रि अष्टमी महासंयोग Chaitra Navratri Mahasanyog Astrology

साल 2020 में चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 1 अप्रैल बुधवार के दिन मनाई जायेगी| इस दिन देवी दुर्गा के आठवें स्वरुप महागौरी रूप की पूजा की जाती है। कई लोग इस दिन कन्या पूजन करते है शास्त्रों की यदि माने तो इस बार अष्टमी तिथि के दिन बुधवार का खूबसूरत संयोग बन रहा है जिस कारण यदि आज के दिन माता महागौरी के साथ भगवन गणेश जी की आराधना भी की जाय तो यह बहुत ही पुण्य कारी संयोग होगा जो भक्तो की हर मनोकामना पूरी करेगा|

अष्टमी पूजा सामग्री Chaitra Navratri Ashatmi Puja Samagri

नवरात्री अष्टमी पूजा सामग्री के रूप में आपको चावल, कुमकुम, दीपक, धूपबत्ती, दूध, दही, घी, शहद, मिठाई, जल, श्रीगणेश और देवी दुर्गा की प्रतिमा और उनके लिए वस्त्र आभूषण, फूल, पान सुपारी, भोग के लिए मोदक के लड्डू, सिंदूर, इत्र, दूर्वा, कर्पूर आदि चीजें चाहिए.

इसे भी पढ़े – जानें अपना वार्षिक राशिफल 2020

नवरात्रि अष्टमी पूजा विधि Chaitra Navratri Durga Puja Vidhi

माता महागौरी परम कल्याणकारी और मंगलकारी हैं। ये ममता की मूरत हैं जो भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करती है. आज के दिन स्नानादि के बाद पूजा स्थल को स्वच्छ कर दुर्गा माँ और गणेश जी की प्रतिमा चौकी पर स्थापित कर उनका व देवी-देवता का आह्वाहन करे. पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी पूजन सामग्री अर्पित करे और वस्त्र आभूषण से उन्हें शुशोभित करे. अब धुप दीप जलाकर आरती और परिक्रमा करें इसके बाद श्री गणेश ज को मोदक और माता महागौरी को नारियल का भोग लगाए साथ ही गणेश के मंत्र श्री गणेशाय नम: और दुर्गा जी के मंत्र दुं दुर्गायै नम: का जाप करें। पूजा के अंत में प्रसाद वितरण करे.