Yogini Ekadashi Vrat 2018 योगिनी एकादशी व्रत तिथि पूजा मुहूर्त

योगिनी एकादशी व्रत तिथि पूजा मुहूर्त 2018 Yogini Ekadashi Vrat Muhurt Katha

Yogini Ekadashi Vrat Yogini Ekadashi Vrat – शास्त्रों में एकादशी का व्रत बेहद ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हर साल में चौबीस एकादशियां आती है. आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को योगिनी या शयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्‍यक्‍ति को उसके सभी प्रकार के पापों से मुक्‍ती मिलती है। इस साल योगिनी एकादशी का यह पावन व्रत 9 जुलाई यानि सोमवार के दिन होगा. इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है. आज हम आपको योगिनी एकादशी की व्रत तिथि, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में बताएँगे.

योगिनी एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त Yogini Ekadashi Vrat Date Time

साल 2018 में योगिनी एकादशी 9 जुलाई सोमवार के दिन होगी. एकादशी तिथि 8 जुलाई रविवार के दिन 23:30 मिनट से शुरू होगी और 9 जुलाई सोमवार के दिन 21:27 मिनट पर समाप्त हो जायेगी. व्रत के पारण का समय होगा 10 जुलाई मंगलवार के दिन 05:34 मिनट से 08:19 मिनट तक का.10 जुलाई पारण के दिन द्वादशी तिथि 06:45  मिनट पर समाप्तहो जायेगी .

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योगिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि Yogini Ekadashi Fast Worship Process

Yogini Ekadashi Vrat- शास्त्रों की माने तो योगिनी एकादशी का व्रत दशमी तिथि की रात से ही शुरू हो जाता है. जो भी इस एकादशी का व्रत रखते है उन्हने दशमी तिथि की रात्रि से ही सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए. व्रत के दिन प्रात:काल उठकर सभी रोज के कामो से निवृत होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। कलश स्थापना कर भगवान् विष्णु जी की पूजा आराधना करनी चाहिए. दिन में योगिनी एकादशी की कथा पढ़नी और सुननी चाहिए. मान्यता है की इस दिन किये गए दान पुण्य से जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है. एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की पूजा भी करनी चाहिए. ऐसा करने से आपको भगवान् विष्णु जी और माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

योगिनी एकादशी व्रत का महत्व Importance of Yogini Ekadashi Vrat

शास्त्रों में योगिनी एकादशी व्रत महत्व बहुत अधिक बताया गया है माना जाता है की इस व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति के सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे भगवान की कृपा प्राप्त होती है यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध एकादशी मानी गयी है इस दिन गरीबो और ब्राह्मणों को भोजन कराने के पुण्य की प्राप्ति होती है  इसके शुभ फल पढ़ने और सुनने वाले दोनों को ही प्राप्त होते है.