विनायक चतुर्थी चौमुखी दीपक का चमकारिक उपाय Vinayak Chaturthi Vrat Katha

विनायक चतुर्थी समृद्धि के लिए करे आसान उपाय Vinayak Vrat Pooja Vidhi 

विनायक चतुर्थीविनायक चतुर्थी- शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह में 2 गणेश चतुर्थी व्रत आते है कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी और शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है. फाल्गुन माह में आने वाले सभी व्रत व त्यौहार बेहद खास माने जाते है मान्यता है की इसी माह में आने वाली गणेश विनायक चतुर्थी जो की साल की आखिरी चतुर्थी भी है इस दिन यदि विधि विधान के साथ व्रत व पूजा की जाय तो व्यक्ति के सभी आर्थिक संकट दूर हो जाते है. आज इस वीडियो में हम आपको साल 2020 फाल्गुन मास की विनायक चतुर्थी के शुभ मुहूर्त पूजा विधि, व्रत का महत्व, व्रथ कथा और इस दिन किये जाने वाले महाउपाय के बारे में बताएँगे.

विनायक चतुर्थी का व्रत क्या है What is Vinayak Chaturthi Vrat

हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक चंद्र माह में दो चतुर्थी आती हैं ये तिथि भगवान गणेश जी को समर्पित है शुक्ल पक्ष के दौरान अमावस्या के बाद जो चतुर्थी आती है उसे विनायक चतुर्थी कहा जाता है और कृष्ण पक्ष के दौरान पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी कहलाती है.

विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त 2020 Vinayak Chaturthi 2020

  1. साल 2020 में विनायक चतुर्थी का व्रत 27 फ़रवरी गुरुवार के दिन रखा जाएगा.
  2. विनायक चतुर्थी पूजा का शुभ मुहूर्त होगा – 27 फ़रवरी प्रातः 11:26 मिनट से  दोपहर 1:42 मिनट तक|
  3. चतुर्थी तिथि प्रारम्भ होगी 27 फ़रवरी प्रातःकाल 04:11 मिनट पर |
  4. चतुर्थी तिथि समाप्त होगी 28 फ़रवरी प्रातःकाल 06:44 मिनट पर |

विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि Vinayak Chaturthi Vrat Puja Vidhi

विनायक चतुर्थी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान के बाद लाल वस्त्र धारण कर उत्तर दिशा की ओर मुंह कर पूजा के लिए बैठ जाय इसके बाद श्री गणेश जी के मंत्र का उच्चारण कर उनका आहवाहन करे और व्रत का संकल्प ले अब सभी पूजन सामग्री गणेश जी को अर्पित करते हुए 21 दूर्वा और लड्डुओं का भोग लगाए. मान्यता है की गणेश जी को उनकी पूजा में दूर्वा अर्पित करने से धन-सम्मान में वृद्धि होती है. दूर्वा अर्पित करते समय ओम गं गणपतयै नम: मंत्र का उच्चारण करें। विनायक चतुर्थी के दिन रात में चंद्र दर्शन कर उन्हें जल का अर्घ्य दे चंद्र पूजन के बाद पूजा संभव कर विघ्नहर्ता गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त करे.

विनायक चतुर्थी व्रत का महत्व Importance of Vinayak Chaturthi 

शास्त्रों में विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। वरद का अर्थ भगवान से किसी भी इच्छा को पूरा करने के लिए की जाने वाली प्रार्थना से होता है. कहा जाता है जो लोग इस विनायक चतुर्थी व्रत का पालन करते हैं, उन्हें भगवान गणेश जी के आशीर्वाद से ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है ज्ञान का आशीर्वाद मिलने पर व्यक्ति जो कुछ भी चाहता है वह उसे प्राप्त करने में सफल रहता है।

फाल्गुन विनायक चतुर्थी महाउपाय Phalgun Vinayak Chaturthi Mahaupay

  1. आज के दिन भगवान गणेश जी की पूजा कर संकटनाशन गणेश श्रोत का पाठ करे.
  2. विनायक चतुर्थी के दिन व्रत कर उन्हें दूर्वा की माला या गेंदे के फूल की माला अर्पित कर उनके मंत्रो का 108 बार जाप करे आज के दिन किया गया ये उपाय व्यक्ति को कार्यसिद्धि, मनोकामना पूर्ति, ज्ञान में वृद्धि और उसके समस्त संकटो का निवारण करता है.
  3. विनायक चतुर्थी के दिन प्रातःकाल पीले या लाल वस्त्र धारण कर भगवान गणेश जी के समक्ष घी का चौमुखी दीपक जलाएं. इस उपाय से आपको हर कार्य में सफलता और आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलने की सम्भावनाये बहुत अधिक बढ़ जाती है.

विनायक चतुर्थी व्रत कथा Vinayak chaturthi vrat katha 

प्राचीन कथा के अनुसार एक बार भगवन शिवजी और माता पार्वती नदी किनारे समय व्यतीत कर रहे थे। तभी माता पार्वती ने भगवन शिव से चौपड़ खेलने को कहा. खेल में हार-जीत का फैसला करने के लिए शिवजी ने घास-फूस से एक बालक बना कर उसमें प्राण दाल दिए खेल में तीन बार माता पार्वती विजयी हुई लेकिन गलती से पुतले ने महादेव को जीता बताया जिससे माता पार्वती क्रुद्ध हो गयी और उन्होंने बालक को कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया। इस पर वह बालक उनसे माफी मांगने लगा और बोला उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। बालक के आग्रह पर माता पार्वती ने कहा कि आज से एक साल बाद कुछ कन्याये यहां आएंगी। उन कन्याओं के कहे अनुसार तुम गणेश चतुर्थी का व्रत करना इससे तुम्हारे कष्ट दूर होंगे। उस बालक ने ऐसा ही किया जिससे भगवान गणेश प्रसन्न हो गए। इसी तररह जो भी सच्ची श्रद्धा के साथ इस व्रत को करता है और व्रत कथा पढता सुनता है तो भगवन गणेश प्रसन्न होकर सभी संकटो का निवारण करते है.