Sita Navmi Vrat 24 April 2018 व्रत पूजा विधि शुभ मुहूर्त Date Time

Sita Navami 24 अप्रैल 2018 व्रत पूजा शुभ मुहूर्त Janaki Navami –

Sita Navmi VratSita Navmi Vrat सीता नवमी वैशाख महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। माता सीता का जन्म नवमी तिथि को हुआ था माता सीता के जन्म के ठीक 1 महीना पहले चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में राम नवमी के दिन श्री राम जी का भी जन्म हुआ था। शास्त्रों के अनुसार सीता नवमी के दिन लोग व्रत उपवास कर माता सीता और भगवान् श्री राम की पूजा आराधना करते हैं इस साल सीता नवमी 24 अप्रैल को मनाई जाएगी. आज हम आपको सीता नवमी की व्रत कथा व पूजा विधि के बारे में बताएँगे.

सीता नवमी व्रत का महत्व Importance of Sita Navmi Vrat –

शास्त्रों में सीता नवमी के व्रत और पूजा का काफी महत्व बताया गया है जिस प्रकार राम नवमी को बहुत ही शुभ दिन के रूप मनाया जाता है Sita Navmi Vrat ठीक उसी प्रकार सीता नवमी को भी बहुत शुभ दिन माना जाता है. क्योंकि शास्त्रों में भगवान श्री राम को विष्णु और माता सीता को लक्ष्मी जी का स्वरूप माना गया है. सीता नवमी के दिन ही सीता माँ धरती पर अवतरित हुई थी इसीलिए कहा जाता है की जो भी इस दिन माता सीता की पूजा अर्चना प्रभु श्री राम के साथ करता है तो उन्हें भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है.

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सीता नवमी 2018 व्रत तिथि व पूजा मुहूर्त Janaki Navami Vrat Date Time Puja Muhurt –

  • सीता नवमी व्रत तिथि – 24 अप्रैल मंगलवार 2018 है
  • सीता नवमी पूजा मुहूर्त – 11:01 से 1:37 बजे तक
  • नवमी तिथि आरंभ – (23 अप्रैल 2018) को 2:16 बजे से शुरू होगी और 12:25 बजे (24 अप्रैल 2018) को समाप्त हो जायेगी.

सीता नवमी व्रत व पूजा विधि Sita Navmi Vrat Puja Vidhi –

Sita Navmi Vrat सीता नवमी के दिन बहुत सी महिलाये अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती है और उनके लिए व्रत रखती है और पूजा होने के बाद अपना व्रत तोड़ती है. इस व्रत के पूजा की तैयारियां अष्टमी तिथि से ही शुरू हो जाती हैं। अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ सफाई के बाद  पूजा घर को गंगाजल आदि छिड़ककर शुद्ध करना चाहिए. Sita Navmi Vrat मंदिर पर सुन्दर सा मंडप तैयार कर उसे सजाना चाहिए  अब इसी मंडप के बीच आसन पर माता सीता व भगवन श्री राम की प्रतिमा की स्थापना करें। अगर प्रतिमा नहीं है तो आप फोटो भी रख सकते है  प्रतिमा के सामने कलश स्थापित करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद नवमी के दिन स्नानादि करने के बाद भगवान श्री राम व माता सीता की पूजा करें। अंत में दशमी के दिन विधिवत मंडप का विसर्जन करना चाहिये। इस प्रकार कहा जाता है की जो भी सीता नवमी के दिन सच्चे मन से भगवान् श्री राम और माता सीता की आराधना और व्रत करते है तो उन्हें भगवान् विष्णु और माँ लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है.