संकष्टी चतुर्थी 2019 शुभ मुहूर्त पूजा विधि Sankashti Chaturthi 2019

गणेश चतुर्थी व्रत Sakat Chauth fast Puja Vidhi

संकष्टी चतुर्थी 2019संकष्टी चतुर्थी 2019- संकष्टी चतुर्थी या संकटहरा चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश जी को समर्पित होता है। संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है संकट हरने वाली चतुर्थी. शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा करने से सभी विघ्न बाधाएं दूर होती है और इस दिन व्रत रखने से भगवान गणेश जी व्यक्ति को विद्या बल बुध्दि का वरदान प्रदान करते है यह चतुर्थी हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाई जाती है. आज हम आपको साल 2019 मई माह में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी की तिथि,  शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय शुभ मुहूर्त के बारे में बताएँगे.

संकष्टी चतुर्थी तिथि, चंद्रोदय शुभ मुहूर्त  Sakashti Chaturthi Date Time Shubh Muhurt

  1. साल 2019 मई माह में संकष्टी चतुर्थी का व्रत 22 मई बुधवार के दिन रखा जाएगा.
  2. चतुर्थी तिथि आरम्भ होगी 22 मई बुधवार के दिन 1 बजकर 40 मिनट पर|
  3. चतुर्थी तिथि समाप्त होगी 23 मई गुरुवार 2 बजकर 40 मिनट पर|
  4. संकट चतुर्थी चन्द्रदर्शन का शुभ समय होगा रात्रि 10 बजकर 28 मिनिट|

संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूजा विधि  Sakat Chauth Tilkut Chauth Mahi Chauth Puja Vidhi

संकष्टी चतुर्थी व्रत में संकट हरने वाले भगवान् श्री गणेश जी का पूजन किया जाता है. इस दिन गणेश जी के सभी भक्त सूर्योदय से लेकर चन्द्रोदय तक उपवास रखते हैं। संकटो से मुक्ति पाने के लिए यह व्रत रखा जाता है. इस दिन बहुत सी महिलाये निर्जल व्रत भी करती हैं। चतुर्थी तिथि के दिन प्रातः काल दैनिक कार्यो से निवृत होने के बाद स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है इसके बाद मंदिर को गंगाजल या साफ़ पानी से स्वच्छ कर गणेश जी की प्रतिमा को लाल या पीले रंग के वस्त्र पर विराजमान किया जाता है इसके बाद उन्हें पान, लड्डू, धूपबत्ती, दूर्वा घास, चावल, हल्दी, कुमकुम चढ़कर उनके मंत्रो का जप आदि कर व्रत कथा पढ़नी चाहिए. मान्यता है की भगवान गणेश जी को दूर्वा बहुत प्रिय है इसीलिए पूजा के समय उन्हें दूर्वा या दूब अवश्य अर्पण करें दिनभर उपवास रखने के बाद रात्रि चन्द्रदर्शन कर चंद्रमा की पूजा के बाद ही उपवास खोलना चाहिए.

चंद्र दर्शन पूजन विधि Sakat Chauth 2019 Chandroday Puja Vidhi

गणेश चतुर्थी के दिन व्रत में रात्रि चंद्र दर्शन की पूजा का विशेष महत्व होता है चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को दूध मिले जल से अर्घ्य देकर तिल और दूर्वा अर्पित करना चाहिए. इसके बाद चन्द्रमा को धूप दीप व आरती कर चंद्र देव से सुख समृद्धि की कामना करते हुए व्रत पूर्ण करना चाहिए. शास्त्रों में ऐसी मान्यता है की इसी दिन भगवान गणेश जी ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया था जिस कारण इस दिन रात्रि चंद्रमा की पूजा बहुत ख़ास होती है.

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संकष्टी चतुर्थी का महत्व Importance sankat chaturthi vrat 

माना जाता है की चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी का विधिवत पूजन और चन्द्र दर्शन बहुत ही शुभ फल देने वाला होता है चन्द्रोदय के बाद ही व्रत पूर्ण होता है। कहते है की जो व्यक्ति इस दिन पूरे श्रद्धाभाव से  व्रत रखता है और कथा सुनता है भगवान गणेश जी उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और उसकी सभी परेशानियों का अंत कर बल बुद्धि विद्या व समृद्धि का वरदान देते है.