रंगभरी एकादशी व्रत 2020 Rangbhari Ekadashi Date Time Muhurat 2020

रंगभरी एकादशी पूजा विधि Amalaki Ekadashi Puja Vidhi in Hindi

रंगभरी एकादशीरंगभरी एकादशी- फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में होली का पर्व मनाया जाता है फाल्गुन शुक्ल पक्ष होली से पहले आने वाली एकादशी जिसे रंगभरी या आमलकी एकादशी भी कहा जाता है शास्त्रों में इस एकादशी एक बड़ा महात्म्य बताया गया है. प्राचीन है की भगवान शिव फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मां पार्वती से विवाह के बाद इस एकादशी पर गौना लेकर काशी आए थे। कहा जाता है की आज के दिन स्वयं भगवान शिव अपने भक्त के साथ होली खेलते है आज के दिन विशेष रूप से अवले के वृक्ष की पूजा कर भगवान विष्णु जी को प्रसन्न किया जाता है आज हम आपको साल  2020 रंगभरी एकादशी व्रत की तिथि पूजा का शुभ मुहूर्त पूजा विधि और यह एकादशी क्यों जरूरी है इस बारे में बताएँगे साथ ही धनप्राप्ति के लिए किया जानें वाला एक विशेष उपाय भी जानेगे .

आमलकी या रंगभरी शुभ मुहूर्त 2020 Amalaka Ekadashi Dte time 2020

  1. साल 2020 में रंगभरी एकादशी का व्रत 6 मार्च शुक्रवार के दिन रखा जाएगा|
  2. एकादशी तिथि प्रारम्भ होगी – 5 मार्च गुरुवार दोपहर 01:18 मिनट पर |
  3. एकादशी तिथि समाप्त होगी – 6 मार्च शुक्रवार 11:47 मिनट पर |
  4. व्रत के पारण का समय होगा 7 मार्च प्रातःकाल 06:43 मिनट से 09:05 मिनट तक |

रंगभरी एकादशी पूजा विधि Amalaka Ekadashi Puja Vidhi

जो भी लोग इस व्रत को करते है उन्हें दशमी तिथि से ही व्रत के सभी नियमो का पालन करना चाहिए. रंगभरी एकादशी के दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा स्थान पर भगवान शिव गौरी और विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें। अब हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें और विधिवत इन सभी का पूजन करे. रंगभरी एकादशी को आमलकी एकादशी भी कहा जाता है है मान्यतानुसार आंवले के पेड़ पर भगवान विष्णु जी का निवास माना गया है जिस कारण इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा अवस्य ही करनी चाहिए अगले दिन द्वादशी की सुबह व्रत का पारण करते हुए ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा देकर विदा करे.

रंगभरी एकादशी व्रत का महत्व Amalaka Ekadashi Importance

मान्यता है की आज के दिन काशी में बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार कर उन्हें दूल्हे के रूप में सजाया जाता है. इसके बाद बाबा विश्वनाथ जी और माता गौरा का गौना कराया जाता है क्योकि रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव माता गौरा से विवाह के बाद पहली बार काशी लाए थे। तभी से फाल्गुन मास में आने वाली एकादशी के दिन रंग डालने और गुलाल उड़ाकर खुशियां मनाने की प्रथा है. रंगभरी एकादशी का व्रत और पूजन करने व्यक्ति के सौभाग्य में वृद्धि होती है.

रंगभरी एकादशी महाउपाय Amalaka Ekadashi Mahaupay

मान्यता है की रंगभरी एकादशी के दिन यदि कुछ आसान उपाय किये जाय तो सौभाग्य की प्राप्ति होती है आंवला या रंगभरी एकादशी के दिन उपवास रखकर दोपहर या मध्य रात्रि के समय भगवान शिव की पूजा करें और उनके समक्ष दीपक जलाकर उन्हें सच्ची श्रद्धा के साथ हरे रंग का अबीर अर्पित करें.  इसके बाद भगवान शिव के मंत्र “नमः शिवाय” तीन माला का जाप करें शास्त्रों में यह उपाय बेहद चमत्कारिक माना जाता है इस उपाय को करने से व्यक्ति की सभी तरह की समस्याओं का निवारण होने के साथ ही उसके सौभाग्य में वृद्धि होती है.

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रंगभरी एकादशी पर भूल से भी न करे ये काम

शास्त्रों में हर व्रत के कुछ नियम बताये गए है इसीलिए यदि आप रंगभरी एकादशी का व्रत करते है तो आपको कुछ बातो का विशेष रूप से ख्याल रखना चाहिए मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में विष्णु जी का वास होता है। इसलिए आंवले के पेड़ की पूजा किसी अन्य दिशा की ओर करने की बजाय पूर्व दिशा की ओर मुंह करके करनी चाहिए।

  1. आंवले के पेड़ को पूजनीय माना गया है इसीलिए इसके आस पास किसी भी तरह की अशुद्धता नहीं करनी चाहिए.
  2. जब भी आप आंवले के पेड़ की पूजा करते है तो पूजा के बाद पेड़ की आरती कर उसकी परिक्रमा करना बिलकुल न भूले.