प्रदोष व्रत जनवरी 2020 January Pradosh Vrat Date Time 2020 

प्रदोष व्रत कब है 2020 Pradosh Vrat Date Time 2020

प्रदोष व्रत प्रदोष व्रत जिसे त्रयोदशी व्रत के नाम से भी जानते हैं। यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित होता है। पुराणों के अनुसार कहा जाता है की इस व्रत को करने से बेहतर स्वास्थ और लम्बी आयु का वरदान मिलता है. यह व्रत महीने में दो बार आता है। सूर्यास्त के बाद और रात के आने से पहला का समय प्रदोष काल कहलाता है. जो भगवान शिव की आराधना और इच्छापूर्ति के लिए बेहद खास माना जाता है आज हम आपको साल 2020 जनवरी माह में आने वाले प्रदोष व्रत की तिथि पूजा विधि और इससे जुडी सभी महत्वपर्ण बातो के बारे में बात करेंगे.

प्रदोष व्रत तिथि Pradosh Vrat January Month Date

यूँ तो हर महीने कोई न कोई व्रत तिथि आती ही लेकिन इन सबमे प्रदोष व्रत बहुत अधिक ख़ास माना जाता है महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि में शाम का समय प्रदोष काल कहलाता है मान्यता है कि भगवान शिव प्रदोष के समय कैलाश पर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं जिस कारण लोग शिव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन व्रत रखते हैं। साल 2020 में जनवरी माह की 22 तारिख बुधवार के दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा.

प्रदोष व्रत पूजा विधि Pradosh Vrat Puja Vidhi

शास्त्रों में प्रदोष व्रत की पूजा और मंत्र शाम के समय करना शुभ माना जाता है त्रयोदशी तिथि के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान के बाद निराहार व्रत का संकल्प ले. इसके बाद भगवान शिव की बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, गंगाजल आदि पूजन सामग्री से भगवान शिव की पूजा करें। पूरे दिन का उपवास के बाद सूर्यास्त होने से कुछ देर पहले फिर से स्नान करे और शुद्ध वस्त्र धारण करें पूजा स्थल को शुद्ध कर लें और मंडप तैयार करे अब पूजा के लिए उतर-पूर्व दिशा में मुंह करके कुशा के आसन पर बैठकर भगवान शिव के मंत्र ऊँ नम: शिवाय का जाप करें और जल का अर्घ्य दे और अंत में व्रत कथा पढ़े व सुने.

प्रदोष व्रत का महत्व व लाभ Importance and Benefits of Pradosh Vrat

प्रदोष व्रत का दिन के अनुसार अलग अलग महत्व होता है यदि यह व्रत रविवार को हो तो उपासक को आयु में वृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य का वरदान मिलता है. सोमवार का प्रदोष व्रत मनोकामनायों पूर्ती के लिए किया जाता है यदि यह व्रत मंगलवार को हो तो रोगों से मुक्ति दिलाता है बुधवार हो हो तो कामना सिद्ध करता है बृहस्पतिवार के दिन प्रदोष व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है वही यदि यह व्रत शनिवार को पड़े तो संतान प्राप्ति का वरदान व्यक्ति को प्राप्त होता है इस तरह यह व्रत बहुत ही ख़ास मना गया है.

प्रदोष व्रत उद्यापन विधि Pradosh Vrat Updhayapan Vidhi

शास्त्रों के अनुसार जो लोग प्रदोष व्रत को 11 या फिर 26 त्रयोदशी तक रखते हैं तो उन्हें व्रत का उद्यापन पूरे विधि विधान से करना चाहिए.

  1. व्रत का उद्यापन त्रयोदशी तिथि के दिन ही करे.
  2. प्रदोष व्रत के उद्यापन से पहले श्री गणेश जी की पूजा करे.
  3. अगले दिन त्रयोदशी तिथि को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर ऊँ उमा सहित शिवाय नम: मंत्र का 108 बार जाप और हवन करे.
  4. हवन पूरा होने के बाद भगवान शिव की आरती और शान्ति पाठ करे.
  5. अंत में दो ब्रह्माणों को भोजन कराकर उद्यापन की विधि पूरी करे.

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बुद्ध प्रदोष व्रत महाउपाय  Pradosh Vrat Mahaupay

प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का दिन होता है और जो प्रदोष व्रत बुधवार के दिन पड़ता है उसे बुध प्रदोष कहते हैं. शास्त्रों के अनुसार यदि बुध प्रदोष व्रत के दिन कुछ उपाय किये जाय तो व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं और उसे स्वास्थ्य संतान का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

इस दिन बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए देवी दुर्गा और भगवान गणेश जी की पूजा करें और भगवान गणेश जी के सामने घी का दीपक जलाकर ॐ गं गणपतये नमः मन्त्र का एक माला जाप करे इस उपाय को करने से व्यक्ति को संतान सुख और धन धान्य में वृद्धि का शिरवाद प्राप्त होता है.