मोक्षदा एकादशी शुभ मुहूर्त 2019 Mokshada Ekadashi Date Time 2019

मोक्षदा एकादशी व्रत शुभ मुहूर्त 2019 Mokshada Ekadashi Vrat Tithi 2019

Mokshada Ekadashi Mokshada Ekadashi – मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन मनाई जाने वाली एकादशी मोक्षदा एकादशी के रुप में जानी जाती है. यह एकादशी अनेकों पापों को नष्ट करने वाली है. दक्षिण भारत में इसे वैकुण्ठ एकादशी के नाम से भी जानते है. परकाचीन मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के प्रारम्भ होने से पूर्व अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. इसीलिए इस दिन कृष्ण पूजा भी की जाती है और ब्राह्राण भोजन कराकर दान करने से विशेष फल प्राप्त होते है. आज हम आपको साल 2019 मोक्षदा एकादशी व्रत की तिथि पूजा का शुभ मुहूर्त और इसकी पूजा विधि के बारे में बताएँगे.

मोक्षदा एकादशी व्रत तिथि शुभ मुहूर्त 2019 Mokshada Ekadashi Date Timing 2019

  1. साल 2019 में मोक्षदा एकादशी का व्रत 8 दिसंबर रविवार के दिन रखा जाएगा.
  2. एकादशी तिथि प्रारम्भ होगी – 7 दिसंबर शनिवार प्रातःकाल 06:34 मिनट पर |
  3. एकादशी तिथि समाप्त होगी – 8 दिसंबर रविवार प्रातःकाल 08:29 मिनट पर |
  4. एकादशी व्रत के पारण का समय होगा – 9 दिसम्बर सोमवार सुबह 7 बजकर 6 मिनट से लेकर 9 बजकर 9 मिनट तक |

मोक्षदा एकादशी व्रत पूजा विधि Mokshada Ekadashi Pooja Vidhi

शास्त्रों के अनुसार मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान श्री कृष्ण, महर्षि वेद व्यास और श्रीमद् भागवत गीता का पूजन करने का विधान है एकादशी व्रत से पूर्व दशमी तिथि को दोपहर के समय एक बार भोजन करना चाहिए। अगले दिन यानि की एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प ले. इसके बाद पूरे विधि विधान के साथ भगवान श्री कृष्ण की आराधना करें व उन्हें धूप,दीप, नैवेद्य व सभी पूजन सामग्री अर्पित करें। ऐसी मान्यता है की इस दिन रात्रि पूजा और जागरण करना बहुत ही शुभ होता है। एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि को पूजन के बाद किसी जरुरतमंद व्यक्ति को भोजन व दान-दक्षिणा देकर भोजन ग्रहण कर व्रत पूर्ण करना चाहिए.

मोक्षदा एकादशी का महत्व Mokshada Ekadashi Importance

शास्त्रों में इस एकादशी का बड़ा महत्व बताया गया है एकादशी का यह व्रत करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है वहीं इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के सभी जाने अनजाने किये पापों का नाश होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। कहा जाता है की भागवत गीता के चिंतन से अज्ञानता दूर होकर मनुष्य का मन आत्मज्ञान की ओर अग्रसर हो जाता है. है।इस दिन श्रीमद् भागवत गीता, भगवान श्रीकृष्ण और महर्षि वेद व्यास जी का विधिपूर्वक पूजन करने से जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है.