Mithuna Sankranti Puja Muhurt 2018 मिथुन संक्रांति रजा पर्व

मिथुन संक्रांति रजा पर्व Mithuna Sankranti 2018 Puja Vidhi Shubh Muhurt –

Mithuna Sankranti Pujaमिथुन संक्रांति Mithuna Sankranti Puja का त्यौहार हिन्दू धर्म में मनाये जाने वाले सभी महत्वपूर्ण धार्मिक त्योहारों में से एक है पंचांग के अनुसार यह साल का तीसरा महीना होता है पूरे साल भर में आने वाली 12 संक्रांति दान-पुण्य और अन्य कार्यों के लिए शुभ मानी जाती है. इस दिन सूर्य का वृषभ राशि से मिथुन राशि में प्रवेश होता है इसीलिए इसे मिथुन संक्रांति भी कहा जाता है। इस राशिपरिवर्तन के कारण कुछ शुभ अशुभ प्रभाव भी देखने को मिलते है जिस कारण इस दिन पूजा का विशेष महत्व होता है। उड़ीसा में मिथुन संक्रांति को बड़े त्यौहार राजा परबा के रूप में मनाया जाता है. आज हम आपको मिथुन संक्रांति के शुभ मुहूर्त पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में बताएँगे.

मिथुन संक्रांति शुभ मुहूर्त 2018 Mithuna Sankranti Puja Shubh Muhurt-

साल 2018 में मिथुन संक्रांति का पर्व 15th जून 2018 को शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा. मिथुन संक्रांति पुण्यकाल शुभ मुहूर्त 15th जून को 11:52 मिनट से 18:16 मिनट तक होगा.

राशिअनुसार जाने साल 2018 का भविष्यफल

संक्रांति के मुहूर्त की कुल अवधि = 6 घंटा 24 मिनट की होगी।

संक्रांति काल का समय दिन में 11:52 मिनट पर होगा।

संक्रांति के दिन महापुण्य काल का शुभ समय 11:52 से 12:16 मिनट तक होगा.

मिथुन संक्रांति की पूजा विधि Mithuna Sankranti Puja Vidhi –

मिथुन संक्रांति के दिन सिलबट्टे को भूदेवी मानकर इसकी पूजा की जाती है. मान्यताओं के अनुसार सिलबट्टे को दूध और पानी से स्‍नान आदि कराकर चंदन, सिंदूर, फूल व हल्‍दी चढाने के विधान है. इस दिन पूजा करने के बाद गरीबों, जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को दान देने का बहुत अधिक महत्व है. चार दिनों तक मनाये जाने वाले इस पर्व को लोग पूरे हर्षोउल्लास के साथ मनाते है.

मिथुन संक्रांति का महत्व Importance of Mithuna Sankranti –

14 तारीख गुरुवार के दिन सूर्य मध्य रात्रि के बाद बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करने जा रहे है। ज्योतिषशास्त्र अनुसार यह संक्रांति मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक एवं कुंभ राशि वालों के लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगी. संक्रांति के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है. इस संक्राति के बाद वर्षा ऋतू का आगमन होता है संक्रांति के दिन सूर्य भगवान की उपासना करने के पुण्य फलों की प्राप्ति होती है.