गंगा सप्तमी शुभ मुहूर्त 2020 Ganga Saptami 2020 Date and Time

गंगा सप्तमी पूजा उपाय Ganga Saptami Pujan Vidhi and upay

गंगा सप्तमीगंगा सप्तमी- गंगा सप्तमी के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। गंगा सप्तमी बैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आती है. इसे गंगा जयंती या गंगा पूजन भी कहा जाता है। इस दिन गंगा जी में स्नान करने के बाद पित्तरों का तर्पण करने से उन्हें भी मुक्ति की प्राप्ति होती है आज हम आपको इस वीडियो में गंगा सप्तमी 2020 में कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व, के बारे में बताएँगे.

गंगा सप्तमी शुभ मुहूर्त 2020 Ganga Saptami Shubh Muhurat 2020

  1. साल 2020 में गंगा सप्तमी का पर्व 30, अप्रैल बृहस्पतिवार को है.
  2. सप्तमी तिथि प्रारम्भ होगी – 29 अप्रैल सायंकाल 03:12 मिनट पर
  3. सप्तमी तिथि समाप्त होगी – 30 अप्रैल सायंकाल 02:39 मिनट पर
  4. गंगा सप्तमी पूजा का मध्याह्न मूहूर्त होगा – प्रातःकाल 10:59 मिनट से सायंकाल 01:38 मिनट तक
  5. पूजा की कुल अवधि – 02 घण्टे 39 मिनट्स की होगी

गंगा सप्तमी का महत्व Ganga Saptami Importance

शास्त्रों के अनुसार बैसाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में आयी थी। जिस कारण यह दिन गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई इसीलिए इसे गंगा जयंती के नाम से भी जानते है. मान्यता है की आज के दिन गंगा नदी में स्नान करने से मनुष्य के जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। गंगा सप्तमी के दिन मंदिरों में भी विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

गंगा सप्तमी पूजा विधि Ganga Saptami Puja Vidhi

गंगा सप्तमी के दिन प्रात: काल उठकर हो सके तो गंगा नदी में स्नान करे अन्यथा घर पर ही गंगाजल मिले जल से स्नान कर ले. इसके बाद मां गंगा को पुष्प अर्पित कर उनके समक्ष दीपक प्रजवल्लित करे. बहुत से लोग आज के दिन व्रत भी रखतेहै इसके  बाद गंगा सप्तमी की कथा सुने या पढ़ें और गंगा नदी के घाट पर पितरों का तर्पण करे इसके बाद किसी जरूरत मंद व्यक्ति या ब्राह्मण को पितरों के नाम से दान अवश्य करे शाम के सामयिक बार फिर से गंगा जी का विधिवत पूजन और आरती कर पूजा संपन्न करे.

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गंगा सप्तमी की कथा Ganga Saptami Story

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार गंगा जी तीव्र गति से बह रही थी। उस समय जह्नु भगवान ध्यान में लीन थे। गंगा जी भी अपनी गति से बहती जा रही थी । जह्नु ऋषि का कमंडल जो वहीं पर रखा था जैसे ही गंगा जी जह्नु ऋषि के पास से गुजरी तो वह उनका कमंडल और अन्य सामान भी अपने साथ बहा कर ले गई और जब ऋृषि की आंखे खुली तो अपना सामान न देखकर वे क्रोधित हो उठे और अपने क्रोध में वे पूरी गंगा को पी गए। जिसके बाद उन्होंने भागीरथ जी के आग्रह पर गंगा को मुक्त कर दिया और गंगा को अपने कान से बाहर निकाला। मान्यता है की जिस दिन यह घटना घटी वह वैशाख पक्ष की सप्तमी थी। बस तभी से इस दिन को गंगा सप्तमी मनाई जाने लगी इसे गंगा का दूसरा जन्म भी कहा जाता है।