दशहरा तिथि शुभ मुहूर्त 2019 पूजा विधि Dussehra Date Time Muhurt 2019

दशहरा पूजा विधि महत्व Dussehra Puja Vidhi Importance  

Dussehra PujaDussehra Puja- दशहरा हिन्दुओं के सभी प्रमुख त्योहारों में से एक है. यह पर्व अश्विन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली नवरात्रि के दसवे दिन अर्थात दशमी तिथि के दिन होता है. कुछ जगहों पर इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है. विजयदशमी भगवान राम की विजय और दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है. आज हम आपको साल 2019 में मनाये जाने वाले दशहरा पर्व की तिथि शुभ मुहूर्त और इस दिन की जाने वाली पूजा विधि के बारे में बतायंगे.

दशहरा तिथि व शुभ मुहूर्त Dussehra Worship Date Time 2019

  1. साल 2019 में शारदीय नवरात्रि पर्व 29 सितम्बर से शुरू होकर 8 अक्टूबर दशहरे के दिन तक चलेगा.
  2. 7 अक्टूबर को दुर्गा नवमी और 8 अक्टूबर को दुर्गा पूजा व विजयादशमी के साथ नवरात्रो का समापन होगा.
  3. दशहरा का पर्व अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन अपराह्न काल में मनाया जाता है। जिसकी अवधि सूर्योदय के बाद दसवें मुहूर्त से लेकर बारहवें मुहूर्त तक की होती है.
  4. अपराह्न पूजा जा शुभ समय होगा 13:17 मिनट से 15:36 मिनट तक|
  5. दशमी तिथि शुरू होगी 7 अक्टूबर 12:37 मिनट पर|
  6. दशमी तिथि समाप्त होगी 8 अक्टूबर 14:50 मिनट पर|

दशहरा पूजा विधि Dussehra Puja Vidhi

पौराणिक कथाओं के अनुसार दशहरे के दिन भगवान श्रीराम के साथ लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की पूजा करने का विधान है. वही इस दिन माँ दुर्गा की पूजा और शमी के वृक्ष की पूजा का खास महत्व है.  इस दिन प्रातःकाल माँ दुर्गे की विधिवत पूजा कर विसर्जन और नवरात्र का पारण करना चाहिए।अपराह्न काल के समय ईशान कोण की भूमि को स्वच्छ कर चंदन व कुंकुम से अष्टदल कमल बना ले और सभी पूजन सामग्री के साथ देवी अपराजिता और जया विजया देवियों का पूजन करें। मान्यता है की यदि नवरात्र के नौ दिनों तक रोजाना शाम के समय शमी के वृक्ष का पूजन किया जाय तो व्यक्ति को आरोग्य व धन की प्राप्ति होती है। क्योकि माना जाता है की मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लंका विजय से पहले शमी के वृक्ष के सामने नतमस्तक होकर विजय प्राप्ति के लिए प्रार्थना की थी।

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दशहरा का महत्व Importance of Dussehra Festival

दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री राम द्वारा रावण को परास्त कर असत्य पर सत्य की जीत हुई थी. इसी वजह से इस दिन को विजयदशमी या दशहरे के रूप में मनाया जाने लगा.  कुछ जगहों पर यह दिन किसानो के घर नयी फसल के आने के रूप में महत्व रखता है. तो वही भारतीय परंपरा के अनुसार इस दिन शमी के वृक्ष का पूजा बहुत ही महत्वपूर्ण और लाभकारी होता है. आयुर्वेदिक रूप से भी शमी एक गुणकारी औषधि के रूप में प्रचलित है.