दशहरा तिथि शुभ मुहूर्त 2020 Dussehra 2020 Date Time Shubh Muhurt

दशहरा पूजा विधि महत्व Dussehra Puja Vidhi Importance 

दशहरा दशहरा भारतवर्ष में मनाये जानी वाले सभी प्रमुख त्योहारों में से एक है. दशहरा का पर्व अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपराह्न काल में मनाया जाता है कुछ जगहों पर इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक कथाओ के अनुसार जहा एक ओर इस दिन भगवन श्रीराम ने रावण का वध किया तो वही माँ दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था. इसीलिए विजयदशमी का पर्व भगवान राम की विजय और दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है. आज हम आपको साल 2020 में मनाये जाने वाले दशहरा पर्व की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि के बारे में बताएँगे.

दशहरा तिथि व शुभ मुहूर्त Dussehra Worship Date Time 2020

  1. साल 2020 में विजयादशमी दशहरे का पर्व 25 अक्टूबर रविवार के दिन मनाया जायेगा.
  2. दशमी तिथि शुरू होगी- 25, अक्टूबर को प्रातःकाल 07:41 मिनट पर|
  3. दशमी तिथि समाप्त होगी – 26, अक्टूबर को प्रातःकाल 09:00 बजे|
  4. विजयादशमी विजय मुहूर्त होगा- 25, अक्टूबर 01:57 मिनट से 02:42 मिनट तक |
  5. मुहूर्त की कुल अवधि – 45 मिनट्स की होगी
  6. पूजा का अपराह्न मुहूर्त होगा – 25, अक्टूबर अपराह्न 01:12 मिनट से शाम 03:27 मिनट तक |
  7. पूजा की कुल अवधि – 02 घण्टे 15 मिनट्स की होगी|

दशहरा पूजा विधि Dussehra Puja Vidhi

पौराणिक कथाओं के अनुसार दशहरे के दिन भगवान श्रीराम के साथ लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की पूजा साथ ही इस दिन माँ दुर्गा और शमी के वृक्ष की पूजा का खास महत्व है. इस दिन प्रातःकाल माँ दुर्गे की विधिवत पूजा कर शारदीय नवरात्रो का विसर्जन और पारण करना चाहिए। अपराह्न काल के समय ईशान कोण की भूमि को स्वच्छ कर चंदन व कुंकुम से अष्टदल कमल बना ले और सभी पूजन सामग्री के साथ देवी अपराजिता और जया विजया देवियों का पूजन करें। मान्यता है की यदि नवरात्र के नौ दिनों तक रोजाना शाम के समय शमी के वृक्ष का पूजन किया जाय तो व्यक्ति को आरोग्य व धन की प्राप्ति होती है। क्योकि माना जाता है की मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लंका विजय से पहले शमी के वृक्ष के सामने नतमस्तक होकर विजय प्राप्ति के लिए प्रार्थना की थी और उन्हें विजय प्राप्त हुई|

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दशहरा का महत्व Importance of Dusshara Festival

शास्त्रों में विजयादशमी का बड़ा ही धार्मिक महत्व बताया गया है यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री राम द्वारा रावण को परास्त कर असत्य पर सत्य की जीत हुई थी. इसी वजह से इस दिन को विजयदशमी या दशहरे के रूप में मनाया जाने लगा.  कुछ जगहों पर यह दिन किसानो के घर नयी फसल के आने के रूप में महत्व रखता है. तो वही भारतीय परंपरा के अनुसार इस दिन शमी के वृक्ष का पूजा बहुत ही महत्वपूर्ण और लाभकारी होता है. आयुर्वेदिक रूप से भी शमी एक गुणकारी औषधि के रूप में प्रचलित है.