धनतेरस 2020 खरीददारी शुभ मुहूर्त Dhanteras 2020 Date Time Puja Muhurat

धनतेरस खरीददारी मुहूर्त 2020 Dhanteras Puja Vidhi

धनतेरस 2020 धनतेरस 2020 – धनतेरस का पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन मनाया जाता है इसे धन त्रयोदशी व धन्वंतरि जंयती भी कहते है। प्राचीन मान्यता के अनुसार भगवान् धन्वंतरि जी अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं इसीलिए धनतेरस के दिन नए बर्तन खरीदने की परंपरा है. साल 2020 में धनतेरस के दिन करीब 17 सालों के बाद सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा जिस कारण इस दिन का महत्व और भी अधिक होगा. आज हम आपको साल 2020 धनतेरस पर्व की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और खरीददारी के शुभ मुहूर्त के बारे में बताएँगे.

धनतेरस तिथि व पूजा मुहूर्त  2020 Dhanteras Puja Muhurat 2020

  1. साल 2020 में धनतेरस का पर्व 13 नवंबर शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा|
  2. धनतेरस पूजा का शुभ मुर्हुत होगा – 13 नवंबर शुक्रवार सायंकाल 05:30 मिनट से सायंकाल 05:59 मिनट तक|
  3. प्रदोष काल की पूजा का शुभ समय होगा सायंकाल 05:26 मिनट से रात्रि 08:05 मिनट तक|
  4. वृषभ काल की पूजा का शुभ समय होगा सायंकाल 05:30 मिनट से 07:25 मिनट तक|
  5. त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी 12 नवंबर शाम 09:30 मिनट पर|
  6. त्रयोदशी तिथि समाप्त होगी 13 नवंबर शाम 05:59 मिनट पर|

खरीददारी के शुभ मुहूर्त dhanteras Khareeddari Muhurat 2020

  1. 13 नवंबर की शाम करीब 6:00 बजे तक कुल 4 खरीदारी के शुभ मुहूर्त पड़ रहे हैं.
  2. धनतेरस का पर्व त्रयोदशी के दिन होता है इसीलिए 12 नवंबर को त्रयोदशी तिथि लगने के कारण 12 नवंबर को रात्रि 11:30 से 1:00 तक, 1:07 मिनट से 2:45 मिनट तक |
  3. वहीं, 13 नवंबर शुक्रवार को सुबह 5:59 मिनट से 10:06 मिनट तक और 11:08 मिनट से 12:51 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहेंगे
  4. इसके अलावा 3:38 मिनट से सायंकाल 5:00 बजे तक धनतेरस की खरीदारी की जा सकेगी..

धनतेरस पूजन विधि Dhanteras pujan vidhi

धनतेरस के दिन संध्याकाल में की गयी पूजा बहुत ही शुभ मानी जाती है. प्रदोषकाल में पूजास्थल पर उत्तर दिशा में भगवान कुबेर और धन्वन्तरि जी की प्रतिमा स्थापित कर उनकी विधिवत पूजा करे. साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश जी की पूजा करे. पूजा में भगवान कुबेर को सफेद मिठाई और धनवंतरि जी को पीली मिठाई का भोग लगाए और सभी पूजन सामग्री अर्पित करते हुए आरती कर ले. धनतेरस के दिन यमदेव के नाम से एक दीपक निकालने की भी परंपरा है| आज के दिन यमदीपदान से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता.