Chaitra Navratri March 2018 चौथा दिन माँ कूष्माण्डा की पूजा विधि

नवरात्री माँ कूष्माण्डा पूजा विधि महत्व Chaitra Navratri 2018 Fourth Day Worship –

Chaitra Navratri March 2018 Chaitra Navratri March 2018 नवरात्री के चौथे दिन माता कूष्माण्डा की पूजा की जाती है देवी भागवत पुराण में भी बताया गया है कि चौथे दिन मां दुर्गा को कूष्मांडा रूप में पूजा जाता है अपनी मंद मुस्‍कान द्वारा ‘ब्रह्मांड’ की उत्‍पत्ति करने के कारण ही दुर्गा माँ के इस रूप को कुष्मांडा कहा गया. मान्‍यता है कि देवी कूष्माण्डा ने अपनी मुस्कान से ही ब्रह्मांड की रचना इसीलिए इन्‍हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है.

तो चलिए जानते है माँ दुर्गा के चौथे रूप यानि की माँ कूष्माण्डा की पूजा अर्चना कैसे करनी चाहिए और इसके क्या फल मिलते है.

देवी कूष्माण्डा का स्वरुप Chaitra Navratri March 2018 After Holi Fourth Day Devi Koshmanda Worship –

देवी कूष्मांडा को आदिशक्ति का चौथा स्वरूप माना गया है। इनके स्वरूप की अगर बात करे तो पुराण में कहा गया है कि इनकी आठ भुजाएं हैं और ये सिंह पर सवार रहती हैं। मां के सात हाथों में चक्र, गदा, धनुष, कमण्डल, अमृत से भरा हुआ कलश, बाण और कमल का फूल है. आज हम आपको माँ दुर्गा के चौथे रूप यानि की माँ कूष्माण्डा की पूजा विधि और भोग के बारे में बताएँगे जिससे आप माँ का आशीर्वाद प्राप्त कर सके.

माता कूष्मांडा के व्रत का पूजन कैसे करे Chitra Navratr March 2018 Fast Worship –

नवरात्री में माँ दुर्गा पूजा के चौथे दिन माता कूष्माण्डा की विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए। माँ के इस रूप की पूजा का विधान भी ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार उनके अन्य रुपों की पूजा की जाती है. चौथे दिन हरे कपड़े पहनकर मां कुष्माण्डा का पूजन करें सबसे पहले स्नान करके कलश, माता और अन्य सभी देवी देवता की पूजा करनी चाहिए। पूजा के पश्चात देवी कूष्माण्डा की पूजा करनी चाहिए। पूजा शुरू करने से पहले हाथों में फूल लेकर देवी माँ की आराधना करनी चाहिए साथ ही सच्चे मन से माँ का ध्यान करना चाहिए.  इस प्रकार साधक, भक्त व श्रधालुओं को भगवती कूष्माण्डा सफलता व सुख प्रदान करती हैं। कहा जाता है की दुर्गा माँ के चौथे स्वरुप की पूजा करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते है और मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री और भोग Chaitra Navratri March 2018 Pooja Bhog On Fourth Day –

चौथे दिन देवी माँ को मालपुए का नैवेद्य अर्पित करना चाहिए इस दिन माँ को गुड़ और मालपुए का भोग लगाना चाहिए और फिर पूजा के बाद उसे ब्राह्मण को दान करना चाहिए ऐसा करने से माँ प्रसन्न होती है और भक्त के सभी प्रकार के विघ्न दूर हो जाते है। मान्यता है की माँ कूष्माण्डा की आराधना करने से सभी प्रकार की बीमारियां दूर हो जाती है.