19 May 2020 Jyestha Pradosh Vrat ज्येष्ठ कृष्ण प्रदोष व्रत 2020

भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि 2020 Bhom Pradosh Vrat Poja Vidhi

Pradosh Vrat Pradosh Vrat – हर महीने की दोनों पक्षों यानि शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है जो शिव भक्ति के लिए बहुत खास है.शिव पुराण के अनुसार इस व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल अर्थात शाम के समय की जाती है प्रदोष व्रत जब मंगलवार के दिन पड़ता है तो भौम प्रदोष कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है। आज हम आपको ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी प्रदोष व्रत की शुभ तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, शिव पंचाक्षरी मंत्र और प्रदोष के दिन किये जाने वाले महाउपाय के बारे में बताएँगे.

प्रदोष व्रत तिथि Pradosh Vrat April Month Date

  1. साल 2020 ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी प्रदोष व्रत 19, मई मंगलवार के दिन रखा जाएगा.
  2. प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त होगा- 19, मई मंगलवार सायंकाल 07:07 मिनट से लेकर 09:11 मिनट तक|
  3. ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी तिथि आरम्भ होगी – 19 मई सायंकाल 05:31 मिनटपर |
  4. त्रयोदशी तिथि समाप्त होगी – 20 मई सायंकाल 07:42 मिनट पर |
  5. सूर्यास्त के बाद और रात के आने से पहला का समय प्रदोष काल कहलाता है. जो शिव को प्रसन्न करने के लिए सबसे शुभ समय कहलाता है इसीलिए आज के दिन प्रदोष काल में पूजा की जाती है.

भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि Pradosh Vrat Puja Vidhi

मंगलवार के दिन होने के कारण यह भौम प्रदोष होगा इस दिन भगवन शिव की पूजा करने से सुखी जीवन और सभी संकटो का नाश होता है. प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प ले. ईशान कोण में भगवन शिव और माता पार्वती की स्थापना कर विधिवत पूजा करे प्रदोष व्रत की पूजा में शिव पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय का जप करे प्रदोष काल अर्थात शाम के समय शुभ मुहूर्त में भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराकर उन्हें पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित कर साबुत चावल की खीर का भोग लगाए. इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पण करने से मनोकामना पूरी होती है. अंत में भौम प्रदोष कथा सुनकर आरती कर ले और सभी में प्रसाद वितरण करे.

भौम प्रदोष का महत्व Importance and Benefits of Pradosh Vrat

शिव भक्तों में भौम प्रदोष व्रत का काफी महत्व है। इस व्रत से हजारों यज्ञों को करने का फल प्राप्त होता है। इससे मोक्ष की प्राप्ति और दरिद्रता का नाश होता है। त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को बेहद प्रिय है जिस कारण हर महीने आने वाले प्रदोष व्रत बहुत ही शुभ और पुण्य फलदायी होते है ज्योतिष अनुसार जब मंगलवार के दिन प्रदोष तिथि का योग बनता है, तब यह व्रत रखा जाता है। मंगल ग्रह का एक नाम भौम भी है। जिस कारण आज के दिन व्रत व शिव पूजन से हर तरह के कर्ज से छुटकारा, सुखी गृहस्थ जीवन की प्राप्ति होती है.

प्रदोष व्रत उद्यापन विधि Pradosh Vrat Udhyapan Vidhi

शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत का उद्यापन पूरे विधि विधान से अवश्य करना चाहिए इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है प्रदोष व्रत का उद्यापन त्रयोदशी तिथि के दिन ही करना शुभ होता है. उद्यापन से पहले श्री गणेश जी की पूजा करे त्रयोदशी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद ऊँ उमा सहित शिवाय नम: मंत्र का 108 बार जाप कर हवन कर ले.  हवन पूरा होने के बाद भगवान शिव की आरती और शान्ति पाठ करे. इसके बाद ब्रह्माण को भोजन कराकर उद्यापन की विधि पूरी करे.

इसे भी पढ़े – जानें अपना वार्षिक राशिफल 2020

भौम प्रदोष व्रत महाउपाय Pradosh Vrat Mahaupay

प्रदोष व्रत शिव-गौरी को प्रसन्न करने के लिए सबसे सर्वोत्तम दिन है. मान्यता है की यदि आज के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय किये जाय तो व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होकर उसे कार्यो में सफलता मिलती है.

  1. मंगल ग्रह की शांति के लिए भौम प्रदोष के दिन शाम को हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
  2. हनुमान जी को लाल फूलों की माला और गुड़ का भोग लगायें।
  3. आज के दिन यदि प्रदोष काल में भगवान शिव को जल में कच्चा दूध मिलाकर स्नान कराया जाय और उनके समक्ष घी का दीया जलाया जाय तो इस उपाय को करने मात्र से हर कार्य में सफलता और मनोकामना सिद्ध होती है
  4. कुश के आसन पर बैठकर शिव जी के मन्त्रों का जाप करें पूजा के समय उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठना चाहिए।