नवरात्रों में अष्ट्मी नवमी कन्या पूजन विधि और महत्व Importance of Kanya Pujan in navratri 2017

नवरात्रों में कन्या पूजन का महत्व Importance of Kanya Pujan –

Importance of Kanya PujanImportance of Kanya Pujan मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए नवरात्री में नौ कन्याओं  की पूजा करने का विधान है. देखा जाय तो जब भी कोई  शुभ कार्य होता है तब-तब कन्या पूजन किया जाता है, लेकिन नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। नवरात्र में माता को प्रसन्न करने के लिए हम व्रत करके उनकी आराधना आदि करते हैं.

मान्यता है कि कन्या पूजन से माँ प्रसन्न होती हैं। नवरात्र में माता के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री की पूजा का विधान और महत्व है।

कन्या पूजन कैसे किया जाय Kanya Pujan Tips In Hindi –

कहा जाता है की नवरात्री में नौ कन्याओं को नौ देवियों के रूप में पूजने के बाद ही भक्त का नवरात्र व्रत पूरा होता है.

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Importance of Kanya Pujan अपनी सामर्थ्य के अनुसार कन्याओं को भोग लगाकर दक्षिणा देने मात्र से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती है.  

किस दिन करे कन्या पूजन Kanya Pujan Day –

बहुत से लोग नवरात्रों में अष्ट्मी और बहुत से लोग नवमी के दिन भी कन्या पूजन और भोज रखते हैं ऐसी मान्यता है. दोनों ही दिन कन्या पूजन का अलग- अलग महत्व है. और ये दोनों ही दिन कन्या पूजन के लिए विशेष है. 

कन्या पूजन की विधि Kanya Pujan Vidhi –

भोग के लिए जिन कन्याओं को आपने बुलाना है उन्हें एक दिन पहले ही न्योता दे दे. कोशिश करे घर के प्रवेश द्वार पर कन्याओ का परिवार के सभी सदस्य मिलकर पुष्प वर्षा से स्वागत करे और नव दुर्गा के सभी नौ नामो के जयकारे लगाये. Importance of Kanya Pujan इसके बाद कन्याओं को किसी स्वच्छ जगह पर बिठाकर इनके पैरो को अपने हाथो से धोना चाहिए और पैर छुकर आशीर्वाद लेना चाहिए.

फिर माँ भगवती का ध्यान करके इन देवी रुपी कन्याओ को भोजन करना चाहिए. भोजन के बाद कन्याओ को अपने सामर्थ के अनुसार दक्षिणा, उपहार देकर एक बार फिर से पैर छूकर आशीष लेना चाहिए.

कन्या पूजन के लिए उम्र Kanya Pujan Ke Saal –

नवरात्र में कन्या पूजन के लिए दो वर्ष से दस वर्ष तक की ही कन्याओं का पूजन किया जाना शुभ माना जाता है। Importance of Kanya Pujan शास्त्रों में दो वर्ष की कुमारी, तीन वर्ष की त्रिमूर्त, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की कालिका, सात वर्ष की शांभवी एवं आठ वर्ष की कन्या को सुभद्रा बताया गया है। ये सभी देवी माँ के रूप है. कन्याये कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए  9 से ज्यादा कन्याओं को भी भोग कराया जा सकता है.