नवरात्री 2016 में माँ दुर्गा की पूजा और कलश स्थापना कैसे करे Navratri Durga Puja in 2016 and how to do established pitcher

नवरात्रों में नवदुर्गा की पूजा durga pooja in navratre 

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नवरात्र के दिन हवन और कन्या पूजन का बहुत महत्व होता है नारदपुराण के अनुसार हवन और कन्या पूजन के बिना नवरात्र की पूजा अधूरी होती है.  नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा लाल रंग के फूलों से की जानी चाहिए.

 
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कलश स्थापना और पूजा का सही समय right time to worship Established pitcher

2016 में नवरात्री 1 अक्टूबर से शुरू हो रहे है.  इस साल शारदीय नवरात्री 2016 में कलश स्थापना करने और पूजा करने का सही समय आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन सूर्योदय  के पश्चात १० घड़ी तक अथवा अभिजीत मुहूर्त (11:46 से12:34) है. इसी दिन से नवरात्रे शुरू होंगे नवरात्रि के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है.

क्या हो पूजा सामग्री what is material of worship

नवरात्रों में माँ की पूजा के लिए माँ दुर्गा की सुन्दर मूर्ति, माता की मूर्ति की स्थापना करने के लिए चौकी,  लाल रंग के वस्त्र, कलश, नारियल का फल, आम के पत्ते, फूल, अक्षत, मौली, रोली, पूजा के लिए थाली , धुप और अगरबती, गंगा का जल, कुमकुम, गुलाल पान, सुपारी, चौकी,दीप, नैवेद्य,कच्चा धागा, दुर्गा सप्तसती का किताब ,चुनरी, पैसा, आदि से माँ की पूजा करने के बाद प्रथम प्रतिपदा तिथि को, नैवेद्य के रूप में गाय का घी माता को अर्पित करना चाहिए और फिर वह घी  किसी ब्राह्मण को दान कर देना चाहिए.

कैसे करे नवरात्र में कलश की स्थापना how to Established pitcher

दुर्गा पूजा की शुरूआत करने के लिए सबसे पहले कलश की स्थापना करनी चाहिए. कलश स्थापना का अर्थ यह है कि माता की पूजा अच्छे से सम्पन्न हो और माँ  प्रसन्न होकर हमें सुखसमृद्धि का आशीर्वाद दे.

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को शुद्ध करे. कलश स्थापित किये जानेवाली भूमि अथवा चौकी पर कुंकुंम या रोली से अष्टदलकमल बनाकर निम्न मंत्र से भूमि का स्पर्श करना चाहिए.

ॐ भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धरत्री।

पृथिवीं यच्छ पृथिवीं द्रीं ह पृथिवीं मा हि सीः।।

एक चौकी पर लाल रंग का कपडा बिछा ले उसके बाद कलश में रोली से स्वस्तिक का चिन्ह बनाकर कलश पर तीन धागावाली मौली लपेटे. कलश स्थापना के लिए पूजित भूमि पर सप्तधान्य या सात अनाज जैसे- (जौ,धान,तिल,कँगनी,मूंग, चना, सावा,) अथवा गेहूँ, चावल या जौ आदि रखने के बाद उसके ऊपर जल से भरे कलश को स्थापित कर देना चाहिए कलश के ऊपर चावल से भरी कटोरी रख दे चावल रखते समय गणेश जी का स्मरण करना चाहिए. अब एक नारियल पर चुनरी लपेटकर इसपर कलावा बांध दे  इसके बाद सभी देवताओं का आवाहन करें और धूप दीप जलाकर कलश की पूजा करें. बाद में भोग लगाकर मां की आरती और चालीसा का पाठ करें.

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