देवउठनी एकादशी 2019 Dev Uthani Ekadashi Date Time 2019 

देवउठनी एकादशी 2019 तिथि व शुभ मुहूर्त Dev Uthani Ekadashi 2019

देवउठनी एकादशी 2019देवउठनी एकादशी 2019- कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में दीपावली के बाद आने वाली एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी को देवशयन करते हैं और कहा जाता है की कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन 4 माह शयन के बाद जागते हैं। इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। आज हम आपको साल 2019 देवउठनी एकादशी की तिथि शुभ मुहूर्त और इसकी पूजा विधि के बारे में बताएँगे.

देवउठनी एकादशी तिथि व शुभ मुहूर्त 2019 Dev Uthani Ekadashi Date Time 2019

  1. साल 2019 में देवउठनी एकादशी का व्रत 8 नवंबर 2019 शुक्रवार के दिन रखा जाएगा|
  2. एकादशी तिथि प्रारम्भ होगी – 7 नवम्बर गुरुवार के दिन प्रातःकाल 09:55 मिनट पर|
  3. एकादशी तिथि समाप्त – 8 नवम्बर शुक्रवार 12:24 मिनट पर|
  4. देवउठनी एकादशी व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त होगा 9  नवंबर 6 : 38 मिनट से 8 : 49 मिनट तक |

देवोत्थान एकादशी व्रत और पूजा विधि Dev Uthani Ekadashi Vrat puja Vidhi

मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में 4 माह के शयन के बाद उठते हैं। इस दिन भगवान विष्णु जी का पूजन कर उनसे जागने का आह्वान किया जाता है। इस दिन प्रातःकाल उठकर घर की सफाई के बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प ले और आंगन में भगवान विष्णु जी के चरणों की आकृति बनाये एक ओखली को गेरू से रंगकर सभी पूजन सामग्री फल, मिठाई, बेर, सिंघाड़े, ऋतुफल और गन्ना उस स्थान पर ढककर रख दे. देवोत्थान एकादशी के दिन रात्रि के समय पूजा स्थल के साथ ही घर के बाहर भी दीये जलाने का विधान है और भगवान को जगाने के लिए शंख, घंटा-घड़ियाल आदि बजाने चाहिए.

तुलसी विवाह Dev Uthani Ekadashi Tulsi Vivah 2019

मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह करने का भी विधान है.  इसी एकादशी के दिन तुलसी के पौधे और शालिग्राम का विवाह बड़े ही धूमधाम से किया जाता है शास्त्रों में तुलसी को विष्णु प्रिया कहा गया हैं स्वर्ग में भगवान विष्णु जी के साथ जो महत्व लक्ष्मी जी का है वही महत्व धरती पर तुलसी जी को प्राप्त है.  कहा जाता है की जब देव जागते है तो सबसे पहली प्राथना वो तुलसी की ही सुनते है इस दिन तुलसी विवाह और पूजन करने का अर्थ तुलसी के माध्यम से भगवान का आह्वान करने से ही है। तुलसी विवाह और भगवान हरि के जागने के बाद से ही शुभ व मांगलिक कार्यो का आयोजन भी शुरू हो जाता है.

देवउठनी एकादशी का महत्‍व Importance of Dev Uthani Ekadashi 2019

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी के दिन जब भगवान विष्णु जी क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाते है तभी से 4 महीनो के लिए सभी शुभ कार्य वर्जित हो जाते है और देवउठनी एकादशी के दिन से सभी शुभ कामों की शुरुआत की जाती है. अर्थात रूके हुए शुभ कार्य जैसे विवाह पूजा आदि आरंभ किये जाते है. मान्यता है कि यदि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी की व्रत कथा सुनी जाय तो व्यक्ति को 100 गायों को दान के बराबर का पुण्य प्राप्त होता है.  इस दिन व्रत रखने से बैकुंठ धाम की प्राप्ति के साथ ही चन्दमा के खराब प्रभाव को कम किया जा सकता है.