करवाचौथ व्रत 2019 दुर्लभ संयोग Karwa Chauth 2019 Mahasanyog Puja Vidhi

करवा चौथ व्रत तिथि पूजा मुहूर्त Karwa Chauth Date Time 2019

करवाचौथ व्रत 2019 करवाचौथ व्रत 2019 – शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाए वाला उपवास जिसे करवाचौथ व्रत के नाम से भी जाना जाता है इस दिन सभी सुहागिन महिलाये पूरा दिन निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु की कामना करती है और चंद्रोदय के पश्चात ही व्रत खोलती है ज्योतिष की माने तो इस बार करवाचौथ पर बहुत ही दुर्लभ संयोग बनाने जा रहा है जिसके चलते इस व्रत का प्रभाव और भी अधिक बाद जायेगा. आज हम आपको साल 2019 करवाचौथ व्रत तिथि शुभ मुहूर्त और इस दिन बनाने जा रहे इस ख़ास संयोग के बारे में बात करेंगे.

करवाचौथ शुभ संयोग Karwa Chauth Vrat Shubh Sanyog Puja Vidhi

ज्योतिष अनुसार साल 2019 का यह करवाचौथ सभी सुहागन महिलाओं के लिए बेहद ख़ास होगा क्योकि इस बार करवाचौथ पर करीब 70 साल के बाद बहुत ही शुभ संयोग बन रहा है जिसमे इस बार रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग होने से यह बेहद मंगलकारी होगा यह योग चंद्रमा की 27 पत्नियों में से सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी के साथ होने से बन रहा है। इसीलिए यह सुहागिनों के लिए यह बेहद फलदायी होगा। वही इस बार 17 अक्टूबर करवाचौथ के दिन रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्याभामा योग भी बनेगा इस वजह से यह बहुत ही ज्यादा फलदायी होगा. माना जा रहा है की ऐसा शुभ योग तब बना था जब श्रीकृष्ण औऱ सत्यभामा का मिलन हुआ था.

करवाचौथ व्रत शुभ मुहूर्त 2019 Karwa Chauth Vrat Tithi Shubh Muhurt 2019

  1. साल 2019 में करवाचौथ का व्रत 17 अक्टूबर गुरुवार के दिन रखा जाएगा.
  2. चतुर्थी तिथि शुरू होगी 17 अक्टूबर गुरुवार 6 बजकर 48 मिनट पर|
  3. चतुर्थी तिथि समाप्त होगी 18 अक्टूबर शुक्रवार 7 बजकर 29 मिनट पर|
  4. करवाचौथ पूजा का शुभ मुहूर्त होगा 17 अक्टूबर गुरुवार शाम 05:46 मिनट से 07:02 मिनट तक
  5. पूजा की कुल अवधि 1 घंटे 16 मिनट की होगी|
  6. करवाचौथ चंद्रोदय का समय होगा 08:16 मिनट|

करवा चौथ पूजा-विधि Karwa Chauth Vrat Puja Vidhi

करवाचैथ व्रत के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पहले स्नान कर पूजास्थल को अच्छी तरह से स्वच्छ कर ले और सास द्वारा दी हुई सरगी ग्रहण करे अब करवाचौथ निर्जल व्रत का संकल्प लेते हुए व्रत आरंभ करे पूजा स्थल में कलश स्थापना करे और गेरू व पिसे हुए चावलों के घोल से करवा माता का चित्र बना ले इसके पश्चात माँ गौरी  गणेशजी व भगवान शिव की मूर्तियां चौकी पर स्थापित करते हुए गौरी मैया को सुहाग का सामान अर्पित करे और सभी देवी देवताओं का आह्वाहन करते हुए की पूजा कर करवाचौथ की व्रत कथा पढ़े अथवा सुने| अंत में पति की दीर्घायु की कामना करते हुए सास का आशीर्वाद लेकर उन्हें करवा भेंट करे. रात्रि में चंद्रोदय के बाद छलनी से चंद्र दर्शन कर धूप दीप व चाँद को अर्घ्य देकर पति का आशीर्वाद लेकर व्रत पूरा करे.

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ज्योतिष अनुसार करवा चौथ के मौके पर बन रहे इस शुभ संयोग में यदि  शुभ मुहूर्त में पूजा और कुछ विशेष कार्यो को किया जाय तो इस व्रत का कई हजार गुना फल पति पत्नी को प्राप्त हो सकता है.

  1. करवा चौथ के व्रत में जितना अधिक महत्व व्रत रखने का होता है उतना ही अधिक महत्व इसकी पूजा और करवा चौथ की कथा सुनने का भी है। इस व्रत की कथा ध्यान पूर्वक सुननी चाहिए. संभव हो तो इस दिन सभी महिलाओं को एकचित्त होकर कथा सुननी चाहिए और भजन कीर्तन करने चाहिए.
  2. यह व्रत महिलाओं के वैवाहिक जीवन से जुड़ा होता है इस दिन लाल व पीले रंग के वस्त्रो का प्रयोग जरूर करना चाहिए. ये दोनों ही रंग शुभ माने जाते है और सौभाग्य में वृद्धि करने वाले होते है. यदि संभव हो तो इस दिन अपनी शादी का जोड़ा, लाल रंग की साड़ी या लहंगा पहनना बहुत ही शुभ होता है.
  3. करवाचौथ के दिन सुबह व्रत सुरु करने के बाद और शाम को कथा पढ़ने के बाद सास व घर के बढ़ो का आशीर्वाद अवश्य ही लेना चाहिए. इससे महिलाओं के सौभाग्य में व्रिद्धि होती है और उन्हें व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है.