शनिवार को क्यों चढ़ाते है शनिदेव को तेल How to Impress Shani Dev

शनिवार को क्यों चढ़ाते है शनि को तेल Why People Give Mustard Oil on Lord Shani –

शनिवार को क्यों चढ़ाते है शनिदेव को तेलशनिवार को क्यों चढ़ाते है शनिदेव को तेल – ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिवार को तेल चढ़ाते है उन्हें साढ़े साती और ढय्या में भी शनि की कृपा प्राप्त होती है। लेकिन कभी ना कभी ये प्रश्न तो आपके मन में जरूर आया होगा कि आखिर शनिवार के दिन ही शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है. यह बात बहुत कम लोग ही जानते है.

शनिवार के दिन शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाते है Tips to Impress Shanidev

आज हम आपको बताएँगे कि क्यों शनिवार के दिन ही शनि को तेल चढ़ाया जाता है. वैसे तो शनिदेव जी को तेल चढ़ाने की कई मान्याताएं है जिसमे से यहाँ पर हम आपको दो प्रचलित मान्यताओ के बारे में बताएँगे.

पहली प्रचलित मान्यता –

 पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान हनुमान जी पर शनि की दशा प्रांरभ हुई, उस समय समुद्र पर रामसेतु बांधने का कार्य चल रहा था। पुल बनाते समय यह आंशका सदैव बनी हुई थी कि राक्षस पुल को हानि पहुंचा सकते हैं, इसलिए भगवान हनुमान जी को पुल की सुरक्षा का दायित्व सौपा गया. लेकिन रामकाज में लगे हनुमान पर शनि की दशा आरम्भ होनी थी।

शनिदेव हनुमान जी के बल और कीर्ति भली प्रकार जानते थे इसलिए शनिदेव ने उनके पास पहुंच कर शरीर पर ग्रह चाल की व्यवस्था के नियम को बताते हुए अपना आशय बताया। लेकिन इस पर हनुमान जी ने शनिदेव से कहा कि वे प्रकृति के नियम का उल्लघंन नहीं करना चाहते लेकिन राम-सेवा उनके लिए सर्वोपरि हैं। भगवान हनुमान जी का आशय था कि राम-काज होने के तुरंत बाद ही वे शनिदेव को अपना पूरा शरीर समर्पित कर देंगे.

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लेकिन शनिदेव ने उनका आग्रह नहीं माना और जैसे ही वे भगवान हनुमान जी के शरीर पर आरूढ़ हुए, तभी भगवान हनुमान जी ने भी विशाल पर्वतों से टकराना शुरू कर दिया। शनिदेव भगवान हनुमान जी के शरीर के जिस भी अंग पर आरूढ़ होते, महाबली हनुमान शनिदेव को ही कठोर पर्वत शिलाओं से टकरा देते। फलस्वरूप शनिदेव महाबली हनुमान जी के प्रहार से काफी बुरी तरह से घायल हो गए। इसके पश्चात शनिदेव जी ने हनुमान जी से अपने किए की क्षमा मांगी।

महाबली हनुमान जी ने शनिदेव से वचन लिया कि वे उनके भक्तों को कभी कष्ट नहीं पहुंचाएगें और इसके साथ ही रामभक्त अंजनीपुत्र ने कृपा करते हुए शनिदेव को तिल का तेल दिया, जिसे लगाते ही शनिदेव की सारी पीड़ा शांत हो गई। तभी से शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उन पर तिल का तेल चढ़ाया जाता है।

दूसरी प्रचलित मान्यता –

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब रावण अपने अहंकार में चूर था और उसने अपने बल से सभी ग्रहों को बंदी बना लिया था और इसके साथ ही उन्होंने शनिदेव को भी बंदीग्रह में उलटा लटका दिया था। उसी समय भगवान हनुमान जी भगवान राम के दूत बनकर लंका पहुंचे थे।

और रावण ने हनुमाजी की पूंछ में आग लगवा दी। क्रोधित होकर भगवान हनुमान जी ने रावण की लंका जला दी और लंका जल गई और सारे ग्रह आजाद हो गए, लेकिन उलटे लटके शनि के शरीर में भयंकर पीड़ा हो रही थी और वह दर्द से कराह रहे थे। भगवान हुनमान जी ने शनि के दर्द को शांत करने के लिए उनके शरीर पर तेल से मालिश की और शनि को दर्द से मुक्‍त किया, उसी समय शनिदेव जी ने कहा कि जो भी व्‍यक्ति श्रद्धा भक्ति से मुझ पर तेल चढ़ाएगा उसे उसकी सारी समस्‍याओं से मुक्ति मिलेगी। तभी से शनिदेव पर तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई.